Kniha Zindagi 50-50 Bhagwant Anmol

Zindagi 50-50

Jazyk: Hindčina
Väzba: Brožovaná
Vydavateľ: Rajpal & Sons
Dostupnosť: Skladom u dodávateľa
Odosielame za 14-21 dní
16.18
भावनाएँ, ज़रूरतें, महत्वाकांक्षाएँ-ये सब एक स्त्री की-लेकिन शरीर-पुरुष का! एक बेहद दर्दनाक परिस्थिति...

Informácie o knihe

Jazyk
Hindčina
Väzba
Kniha - Brožovaná
Vydalo
2019
Stránok
208
EAN
9789386534132
ISBN
9386534134
Enbook ID
33009808
Vydavateľ
Hmotnosť
303
Rozmery
140 x 216 x 13

Kompletný popis

भावनाएँ, ज़रूरतें, महत्वाकांक्षाएँ-ये सब एक स्त्री की-लेकिन शरीर-पुरुष का! एक बेहद दर्दनाक परिस्थिति जिसमें ज़िन्दगी, ज़िन्दगी नहीं, समझौता बनकर रह जाती है। ऐसे इन्सान और उसके घरवालों को हर मकाम पर समाज के दुव्र्यवहार और ज़िल्लत का सामना करना पड़ता है। अनमोल इस बात को अच्छी तरह समझता है क्योंकि उसकी अपनी एकमात्र सन्तान और छोटा भाई, दोनों की यही वास्तविकता है, दोनों किन्नर हैं। भाई को पल-पल पिसते, घर और बाहर प्रताड़ित और अपमानित होते हुए देख अनमोल यह दृढ़ निश्चय करता है कि वह अपने बेटे को अधूरी ज़िन्दगी नहीं, बल्कि भरपूर ज़िन्दगी जीने के लिए हर तरह से सक्षम बनायेगा! लेकिन क्या वह ऐसा कर पाता है...पढ़िये इस उपन्यास में।
''...भगवंत अनमोल...ऐसे युवा साहित्यकारों की फेहरिस्त काफ़ी लम्बी है जिन्होंने अपनी वास्तविक प्रेम कहानी लिखी और सेलेब्रिटी राइटर बन गये।''
-दैनिक जागरण-डिज़ायर मैगज़ीन ( ई-एडिशन ), 4 मार्च 2015
''कुछ हिन्दी लेखकों ने बड़े-बड़े अंग्रेज़ी लेखकों को पीछे छोड़ दिया है। उन्हीं में से एक, भगवंत अनमोल, युवाओं के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं।''
-दैनिक जागरण, फरवरी 2015

Zákazníci, ktorí si kúpili túto knihu, kúpili tiež

Visiones

Jorge Burón
14.51

Les

Marek Baroš
7.32

Interventionsdienst

Helmut Kalbfleisch
12.94

Bach for Guitar

JOHANN SEBASTIAN BAC
31.39

Risc

RICARD RUIZ GARZON
23.05

Familiencoaching

Miroslawa Britzkow
27.66

Mobile Multimedia

David Taniar
280.92

I Think I Am a Verb

Thomas A. Sebeok
106.06

Reframing Yeats

Charles Armstrong
180.05